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दिल्ली पुलिस मुख्यालय के बाहर प्रदर्शन करना ACP को पड़ा भारी, मनास्वी वशिष्ठ निलंबित

दिल्ली पुलिस में उस समय हलचल मच गई, जब पुलिस मुख्यालय के बाहर प्रदर्शन में शामिल हुए सहायक पुलिस आयुक्त (ACP) मनास्वी वशिष्ठ को निलंबित कर दिया गया। यह कार्रवाई सोमवार को हुए प्रदर्शन के एक दिन बाद मंगलवार, 3 नवंबर को सामने आई।

मनास्वी वशिष्ठ उन दो पुलिस अधिकारियों में शामिल थे, जिनका हाल ही में तबादला किया गया था। तबादले के विरोध में दिल्ली पुलिस के कई कर्मचारी पुलिस मुख्यालय के बाहर जमा हुए थे। वे दोनों अधिकारियों को उनकी पुरानी तैनाती पर वापस भेजने की मांग कर रहे थे।

पुलिस सूत्रों के मुताबिक, केंद्रीय गृह मंत्रालय ने ACP के खिलाफ निलंबन की कार्रवाई की है। हालांकि, दिल्ली पुलिस की ओर से कार्रवाई के विस्तृत कारणों पर तत्काल कोई आधिकारिक बयान सामने नहीं आया था।

करीब 500 पुलिसकर्मी प्रदर्शन में हुए शामिल

सोमवार को दिल्ली पुलिस मुख्यालय के बाहर शुरू हुआ प्रदर्शन धीरे-धीरे बड़ा हो गया। शुरुआत में करीब 80 से 100 पुलिसकर्मी जमा हुए थे, लेकिन बाद में इनकी संख्या बढ़कर लगभग 500 तक पहुंच गई।

प्रदर्शन में महिला और पुरुष पुलिसकर्मी दोनों शामिल थे। उनके हाथों में पोस्टर और तख्तियां थीं। प्रदर्शनकारियों की प्रमुख मांग ACP मनास्वी वशिष्ठ और शाहदरा थाने के तत्कालीन थाना प्रभारी इंस्पेक्टर अरुण कुमार का तबादला रद्द करने की थी।

प्रदर्शन के दौरान पुलिसकर्मियों ने पुलिस आयुक्त अनुराग कुमार से सीधे बातचीत करने की मांग भी रखी। बाद में पुलिस आयुक्त और वरिष्ठ अधिकारियों ने कर्मचारियों के साथ बैठक की तथा उनकी समस्याएं सुनीं।

आखिर क्यों हुआ था दोनों अधिकारियों का तबादला?

इस पूरे विवाद की शुरुआत 23 अक्टूबर को शाहदरा पुलिस थाने में हुई घटना से हुई थी। उस दिन एक वकील ललित बंसल के साथ कथित मारपीट हुई थी, जिसमें उनके सिर पर गंभीर चोट आई थी।

इसके बाद कुछ वकील कार्रवाई की मांग लेकर शाहदरा थाने पहुंचे। वकीलों का आरोप था कि ACP मनास्वी वशिष्ठ और थाना प्रभारी अरुण कुमार ने उनके साथ दुर्व्यवहार किया और धमकी दी। कुछ वकीलों ने यह भी आरोप लगाया कि ACP ने अपना हथियार दिखाकर उन्हें डराने की कोशिश की।

हालांकि, पुलिस अधिकारियों से जुड़े पक्ष ने इन आरोपों को गलत और बेबुनियाद बताया था। घटना के बाद दिल्ली की जिला अदालतों के वकीलों ने अनिश्चितकालीन काम बंद करने का फैसला लिया था।

बढ़ते विवाद के बीच 28 अक्टूबर को ACP मनास्वी वशिष्ठ को गांधी नगर सब-डिवीजन से विशेष पुलिस इकाई (महिला एवं बच्चों के लिए) में भेज दिया गया। वहीं, इंस्पेक्टर अरुण कुमार को सुरक्षा शाखा में स्थानांतरित कर दिया गया।

पुलिसकर्मियों ने रखीं पांच प्रमुख मांगें

तबादले के विरोध में जुटे पुलिसकर्मियों ने वरिष्ठ अधिकारियों के सामने अपनी कई मांगें रखीं। इनमें वकीलों के साथ विवाद के दौरान पुलिसकर्मियों के खिलाफ कथित दुर्व्यवहार की जांच और दोषियों पर कार्रवाई की मांग भी शामिल थी।

प्रदर्शनकारियों ने पुलिसकर्मियों की शिकायतों के समाधान के लिए एक निश्चित व्यवस्था बनाने पर जोर दिया। उनका कहना था कि अदालत परिसर और थानों में ड्यूटी के दौरान पुलिसकर्मियों की सुरक्षा और सम्मान सुनिश्चित होना चाहिए।

इसके अलावा, पुलिसकर्मियों ने वकीलों के साथ विवाद जैसी परिस्थितियों से निपटने के लिए स्पष्ट मानक संचालन प्रक्रिया (SOP) बनाने की मांग की।

पुलिस विभाग में अनुशासन को लेकर उठे सवाल

किसी पुलिस अधिकारी का अपने ही विभाग के तबादले के फैसले के विरोध में कर्मचारियों के साथ प्रदर्शन में शामिल होना विभागीय अनुशासन को लेकर सवाल खड़े करता है। दूसरी ओर, प्रदर्शन में शामिल पुलिसकर्मियों ने अपनी समस्याओं को वरिष्ठ अधिकारियों तक पहुंचाने के लिए सामूहिक बातचीत की मांग की थी।

अब ACP मनास्वी वशिष्ठ के निलंबन के बाद इस मामले ने नया मोड़ ले लिया है। पुलिसकर्मियों की शिकायतों, वकीलों के आरोपों और विभागीय कार्रवाई से जुड़े सभी पहलुओं पर आगे क्या कदम उठाए जाते हैं, इस पर नजर रहेगी।