अतिक्रमण नहीं हटाने पर सुप्रीम कोर्ट ने रोकी थी BMC कमिश्नर की सैलरी, 27 अवैध निर्माण हटने के बाद मिली राहत
मुंबई में सरकारी जमीन से अतिक्रमण हटाने में देरी को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने बृहन्मुंबई नगर निगम (BMC) की कमिश्नर अश्विनी भिड़े के खिलाफ सख्त रुख अपनाया। अदालत ने 3 नवंबर 2026 को पहले के आदेशों का पालन नहीं करने पर उनकी नवंबर महीने की सैलरी रोकने का निर्देश दिया था। कोर्ट ने कमिश्नर को अवमानना का नोटिस भी जारी किया और BMC पर 5 लाख रुपये का जुर्माना लगाया।
हालांकि, इस कार्रवाई के बाद नगर निगम ने तेजी से कदम उठाए। 4 नवंबर को संबंधित जमीन से 27 व्यावसायिक निर्माण हटा दिए गए। इसके बाद सुप्रीम कोर्ट ने अश्विनी भिड़े के खिलाफ जारी कारण बताओ नोटिस वापस ले लिया और उनकी तथा उनके निजी स्टाफ की सैलरी पर लगी रोक भी हटा दी।
क्या है पूरा मामला?
यह मामला मुंबई के बोरीवली पूर्व इलाके में BEST बस डिपो के लिए निर्धारित करीब 3,400 वर्ग मीटर जमीन से जुड़ा है। इस जमीन पर अतिक्रमण होने के कारण बस स्टेशन परियोजना का काम प्रभावित हो रहा था।
अगस्त 2025 में सुप्रीम कोर्ट ने निजी डेवलपर को जमीन का खाली और शांतिपूर्ण कब्जा BMC को सौंपने का निर्देश दिया था। साथ ही नगर निगम को जमीन अपने कब्जे में लेकर बस स्टेशन को तीन महीने के भीतर चालू करने और वहां मौजूद अतिक्रमण हटाने के लिए कहा गया था।
इसके बावजूद जमीन पूरी तरह खाली नहीं कराई जा सकी। नवंबर 2025 में सुप्रीम कोर्ट ने इस पर नाराजगी जताई और नगर निगम कमिश्नर से अतिक्रमणकारियों, उन्हें जारी किए गए नोटिस और उनके कब्जे से जुड़े दावों की जानकारी मांगी थी।
सुप्रीम कोर्ट ने क्यों रोकी थी सैलरी?
28 जुलाई 2026 को सुप्रीम कोर्ट ने BMC को फिर से तीन महीने का समय देते हुए अतिक्रमण हटाने और अनुपालन रिपोर्ट दाखिल करने का निर्देश दिया था। लेकिन निर्धारित समय के बाद भी कार्रवाई पूरी नहीं हुई।
3 नवंबर को सुनवाई के दौरान BMC ने चार सप्ताह का अतिरिक्त समय मांगा। नगर निगम की ओर से दलील दी गई कि अतिक्रमणकारियों ने सिविल कोर्ट में मुकदमे दायर किए हैं और कुछ दस्तावेज मराठी में होने के कारण उनका अंग्रेजी अनुवाद कराना बाकी है।
सुप्रीम कोर्ट ने इस दलील को पर्याप्त नहीं माना। अदालत ने कहा कि जब सिविल कोर्ट की ओर से कोई अंतरिम रोक नहीं लगाई गई है, तो नगर निगम को अपने आदेशों के पालन में बाधा नहीं होनी चाहिए।
इसके बाद मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली तीन सदस्यीय पीठ ने अश्विनी भिड़े को कारण बताओ नोटिस जारी किया। पीठ में न्यायमूर्ति जॉयमाल्या बागची और न्यायमूर्ति वी. मोहना भी शामिल थे।
सुप्रीम कोर्ट ने नगर निगम की अतिरिक्त समय देने की मांग खारिज करते हुए BMC पर 5 लाख रुपये का जुर्माना लगाया। अदालत ने कमिश्नर और उनके निजी स्टाफ का वेतन जारी करने पर भी रोक लगा दी थी।
सुनवाई के दौरान अदालत ने अधिकारियों की कार्यशैली पर सवाल उठाए और आशंका जताई कि कहीं नगर निगम के अधिकारी अतिक्रमणकारियों के साथ मिलीभगत तो नहीं कर रहे हैं। अदालत ने स्पष्ट किया कि उसके समयबद्ध आदेशों का पालन करना जरूरी है।
27 निर्माण हटाए जाने के बाद बदला आदेश
सुप्रीम कोर्ट की सख्ती के बाद BMC ने 4 नवंबर को बोरीवली की संबंधित जमीन पर कार्रवाई की। नगर निगम की टीम ने वहां बने 27 व्यावसायिक ढांचों को हटा दिया। इस कार्रवाई में करीब 70 कर्मचारियों, दो जेसीबी मशीनों और चार डंपरों का इस्तेमाल किया गया।
नगर निगम की ओर से कार्रवाई की जानकारी अदालत को दिए जाने के बाद सुप्रीम कोर्ट ने अपने 3 नवंबर के आदेश के कुछ हिस्सों को वापस ले लिया। इसमें अश्विनी भिड़े के खिलाफ जारी कारण बताओ नोटिस और वेतन रोकने से संबंधित निर्देश शामिल थे।
कौन हैं अश्विनी भिड़े?
अश्विनी भिड़े महाराष्ट्र कैडर की वरिष्ठ IAS अधिकारी हैं। उन्हें मार्च 2026 में बृहन्मुंबई नगर निगम का आयुक्त नियुक्त किया गया था। वह मुंबई मेट्रो परियोजना से जुड़े कामकाज के कारण भी चर्चा में रही हैं और उन्हें ‘मेट्रो वुमन’ के नाम से जाना जाता है।
इस मामले में सुप्रीम कोर्ट की कार्रवाई ने यह स्पष्ट किया कि सरकारी अधिकारियों को अदालत के समयबद्ध आदेशों का पालन करना होगा। हालांकि, अतिक्रमण हटाए जाने के बाद वेतन रोकने का आदेश वापस ले लिया गया, लेकिन यह मामला सरकारी परियोजनाओं और न्यायिक निर्देशों के पालन को लेकर महत्वपूर्ण माना जा रहा है।











