Indian Archer Ganesh Mani Ratnam

दो एशियाई पदक जीतकर गणेश मणि रत्नम की नजर अब लॉस एंजिल्स ओलंपिक पर, हार से भी लिया सबक

भारतीय तीरंदाजी में अपनी पहचान बना रहे युवा खिलाड़ी गणेश मणि रत्नम थिरुमुरु ने 2026 एशियाई खेलों में शानदार प्रदर्शन कर देश को दो पदक दिलाए हैं। पहली बार एशियाई खेलों में हिस्सा लेने वाले गणेश ने पुरुष कंपाउंड टीम स्पर्धा में स्वर्ण और व्यक्तिगत स्पर्धा में कांस्य पदक जीता। अब उनकी नजर साल 2028 में अमेरिका के लॉस एंजिल्स में होने वाले ओलंपिक खेलों पर है।

गणेश का मानना है कि एशियाई खेलों में मिली सफलता ने उन्हें बड़े लक्ष्य के लिए प्रेरित किया है। हालांकि, व्यक्तिगत स्पर्धा के फाइनल में मिली हार ने भी उन्हें कई अहम सबक दिए हैं। उनका कहना है कि आने वाले समय में अभ्यास, प्रदर्शन में निरंतरता और दबाव के बीच बेहतर खेल दिखाना उनकी प्राथमिकता रहेगी।

चीन को हराकर टीम स्पर्धा में जीता गोल्ड

30 सितंबर 2026 को एशियाई खेलों की पुरुष कंपाउंड टीम स्पर्धा के फाइनल में भारत का मुकाबला चीन से हुआ था। भारतीय टीम में गणेश मणि रत्नम के साथ साहिल जाधव और कुशल दलाल शामिल थे।

फाइनल मुकाबला बेहद रोमांचक रहा। शुरुआती दौर में चीन ने बढ़त बना ली थी, लेकिन भारतीय तीरंदाजों ने शानदार वापसी की। आखिरी चरण में भारतीय टीम ने लगातार सटीक निशाने लगाए और मुकाबला 238-237 से अपने नाम कर लिया।

इस जीत के साथ भारत ने कंपाउंड तीरंदाजी की तीनों टीम स्पर्धाओं में स्वर्ण पदक जीतकर शानदार उपलब्धि हासिल की।

व्यक्तिगत स्पर्धा में कांस्य, फाइनल की हार से मिली सीख

टीम स्पर्धा में गोल्ड जीतने के बाद गणेश ने व्यक्तिगत कंपाउंड स्पर्धा में भी पदक हासिल किया। हालांकि, वह स्वर्ण पदक के मुकाबले में दक्षिण कोरिया के किम जोंग-हो से हार गए और उन्हें कांस्य पदक के लिए मुकाबला करना पड़ा।

कांस्य पदक के मुकाबले में गणेश ने वियतनाम के कॉन्ग डुक डांग को 149-144 से हराया। इस तरह उन्होंने अपने पहले ही एशियाई खेलों में दो पदक जीतकर शानदार प्रदर्शन किया।

गणेश ने बताया कि फाइनल में हार के बाद उन्होंने खुद को संभाला और अगले मुकाबले पर ध्यान केंद्रित किया। उनके मुताबिक, हार से निराश होने के बजाय उससे सीख लेकर अगले मैच में बेहतर प्रदर्शन करना जरूरी था।

रोजाना कई घंटे करते हैं अभ्यास

गणेश की सफलता के पीछे नियमित अभ्यास और अनुशासित दिनचर्या की अहम भूमिका है। वह सुबह करीब 6:30 बजे उठते हैं और सुबह चार घंटे तीरंदाजी का अभ्यास करते हैं। इसके बाद कुछ समय आराम करने के बाद दोपहर 12 बजे से शाम 6 बजे तक फिर अभ्यास करते हैं।

उनके प्रशिक्षण में केवल निशाना लगाने की तकनीक ही नहीं, बल्कि मानसिक मजबूती और प्रतियोगिता के दबाव से निपटने की तैयारी भी शामिल है।

एशियाई खेलों की तैयारी के दौरान खिलाड़ियों ने मुकाबले जैसी परिस्थितियों में अभ्यास किया। टीम के साथ मनोवैज्ञानिक की मदद भी ली गई, ताकि बड़े मुकाबलों में खिलाड़ी अपने विचारों और भावनाओं को बेहतर तरीके से संभाल सकें।

कोरियाई खिलाड़ियों की तकनीक से भी सीख रहे हैं

दक्षिण कोरिया तीरंदाजी में लंबे समय से मजबूत प्रदर्शन करता रहा है। गणेश ने बताया कि कोरियाई खिलाड़ियों की प्रशिक्षण पद्धति से भी उन्हें सीखने का मौका मिला है।

प्रशिक्षण के दौरान खिलाड़ियों की हृदय गति, सांस लेने की रफ्तार और निशाना लगाने की स्थिरता पर नजर रखी जाती है। इन आंकड़ों से यह समझने में मदद मिलती है कि दबाव के समय शरीर किस तरह प्रतिक्रिया करता है।

गणेश के मुताबिक, प्रतियोगिता के दौरान शांत रहना और अपनी प्रक्रिया पर भरोसा करना बेहद जरूरी है। उनका ध्यान इस बात पर रहता है कि सामने कौन-सा खिलाड़ी है, इसके बजाय वह अपने अभ्यास और तकनीक के अनुसार निशाना लगाएं।

लॉस एंजिल्स ओलंपिक 2028 है अगला बड़ा लक्ष्य

गणेश मणि रत्नम अब 2028 के लॉस एंजिल्स ओलंपिक की तैयारी में जुटना चाहते हैं। उनके लिए यह लक्ष्य इसलिए भी खास है क्योंकि कंपाउंड तीरंदाजी पहली बार ओलंपिक कार्यक्रम का हिस्सा बनने जा रही है।

भारत ने एशियाई खेलों में कंपाउंड मिश्रित टीम स्पर्धा के लिए ओलंपिक कोटा हासिल किया है। इससे भारतीय खिलाड़ियों के सामने ओलंपिक में पदक जीतने का नया अवसर खुला है।

गणेश का कहना है कि एशियाई खेलों में मिले दो पदकों ने उनका आत्मविश्वास बढ़ाया है। अब वह विश्व कप और विश्व चैंपियनशिप जैसी प्रतियोगिताओं में लगातार अच्छा प्रदर्शन करके अपनी तैयारी मजबूत करना चाहते हैं।

परिवार और कोचों के सहयोग को बताया अहम

गणेश ने अपनी उपलब्धियों का श्रेय परिवार, कोचों और खेल से जुड़ी संस्थाओं के सहयोग को भी दिया है। उन्होंने बताया कि शुरुआती दौर से ही परिवार ने उनका साथ दिया। स्कूल, प्रशिक्षकों और खेल संस्थाओं से मिले सहयोग ने उन्हें राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर तक पहुंचने में मदद की।

कराटे से खेल की शुरुआत करने वाले गणेश ने बाद में तीरंदाजी को अपना करियर बनाया। आज एशियाई खेलों में दो पदक जीतने के बाद उनका अगला लक्ष्य ओलंपिक में भारत का प्रतिनिधित्व करना और पदक हासिल करना है।