जौहर यूनिवर्सिटी की जमीन पर फिर बढ़ीं आजम खान की मुश्किलें, शत्रु संपत्ति मामले की जांच तेज होने के संकेत
रामपुर में जौहर यूनिवर्सिटी से जुड़ी शत्रु संपत्ति के मामले में आजम खान की मुश्किलें बढ़ती दिख रही हैं। ईडी की कार्रवाई और नए खुलासों के बाद जमीन पर कब्जे से जुड़े आरोप फिर चर्चा में हैं।
रामपुर के सिंहनखेड़ा गांव में जौहर यूनिवर्सिटी के आसपास करीब 34 एकड़ जमीन को शत्रु संपत्ति के रूप में दर्ज किया गया था। इसमें कुल 45 भूखंड शामिल बताए गए हैं। जिला प्रशासन की जांच में आरोप सामने आया कि इन जमीनों का इस्तेमाल यूनिवर्सिटी के लिए किया गया, जबकि जमीन को ट्रस्ट को दी गई लीज बाद में रद्द कर दी गई थी।
ईडी के मुताबिक, लीज रद्द होने के बावजूद जमीन पर कब्जा जारी रहा। बाद में केंद्रीय गृह मंत्रालय के अधीन शत्रु संपत्ति अभिरक्षक ने रामपुर जिला प्रशासन की मदद से जमीन का कब्जा वापस ले लिया। यह कार्रवाई इस मामले का अहम हिस्सा है।
13 अक्टूबर को दर्ज हुई नई एफआईआर
इस मामले में एक और महत्वपूर्ण घटनाक्रम 13 अक्टूबर 2026 को सामने आया। ईडी की ओर से दी गई जानकारी के आधार पर रामपुर के अजीमनगर थाने में नई एफआईआर दर्ज की गई। इसमें आजम खान, मौलाना मोहम्मद अली जौहर ट्रस्ट और अन्य लोगों के नाम शामिल हैं।
इस एफआईआर में आपराधिक साजिश, धोखाधड़ी और भ्रष्टाचार से जुड़ी धाराएं लगाई गई हैं। पुलिस को अब जमीन से जुड़े दस्तावेजों, ट्रस्ट के लेनदेन और सरकारी धन के कथित इस्तेमाल की जांच करनी है।
इसलिए यह कहना सही होगा कि जांच शुरू होने की संभावना भर नहीं है, बल्कि संबंधित मामले में एफआईआर दर्ज होने के बाद जांच की प्रक्रिया आगे बढ़ रही है।
ईडी ने यूनिवर्सिटी की संपत्ति भी की कुर्क
28 अक्टूबर को प्रवर्तन निदेशालय ने जौहर यूनिवर्सिटी की जमीन और इमारतों को अस्थायी रूप से कुर्क करने की कार्रवाई की। ईडी के अनुसार, कुर्क की गई संपत्तियों का अनुमानित बाजार मूल्य करीब 1,170 करोड़ रुपये है। एजेंसी ने इनमें से 426.46 करोड़ रुपये को कथित अपराध से अर्जित संपत्ति बताया है।
ईडी का दावा है कि यूनिवर्सिटी के निर्माण में सरकारी धन, निर्माण सामग्री और ठेकेदारों से मिले चंदे के इस्तेमाल में गड़बड़ियां हुईं। एजेंसी ने यह भी कहा कि निर्माण की कुल अनुमानित लागत और वैध स्रोतों से समझाई जा सकने वाली रकम के बीच बड़ा अंतर मिला है।
हालांकि, ये जांच एजेंसी के आरोप और निष्कर्ष हैं। इन पर अंतिम फैसला न्यायिक प्रक्रिया के बाद ही होगा।
आजम खान ईडी की गिरफ्त में, 14 दिन की न्यायिक हिरासत
जौहर यूनिवर्सिटी से जुड़े धनशोधन मामले में ईडी ने 31 अक्टूबर को आजम खान को गिरफ्तार किया था। इसके बाद 1 नवंबर को अदालत ने उन्हें 14 दिन की न्यायिक हिरासत में भेज दिया। यह मामला यूनिवर्सिटी के निर्माण, जमीन के कथित अवैध अधिग्रहण और धन के लेनदेन से जुड़ा है।
ईडी की कार्रवाई के बाद आजम खान की कानूनी मुश्किलें बढ़ गई हैं। दूसरी ओर, उनके वकील ने गिरफ्तारी की प्रक्रिया पर सवाल उठाए हैं। 3 नवंबर को आजम खान ने अपनी गिरफ्तारी को चुनौती देते हुए सुप्रीम कोर्ट का रुख भी किया है।
आगे किन बिंदुओं पर हो सकती है जांच?
जौहर यूनिवर्सिटी से जुड़े मामले में अब कई महत्वपूर्ण सवालों के जवाब तलाशे जाने हैं। इनमें शत्रु संपत्ति की जमीन का इस्तेमाल कैसे हुआ, लीज रद्द होने के बाद भी उस पर कब्जा कैसे बना रहा और जमीन से जुड़े राजस्व रिकॉर्ड में कोई बदलाव किया गया था या नहीं, जैसे मुद्दे शामिल हैं।
इसके अलावा, यूनिवर्सिटी के निर्माण में इस्तेमाल हुई रकम और सरकारी परियोजनाओं से जुड़े धन के लेनदेन की भी जांच हो रही है। पुलिस और ईडी की जांच में सामने आने वाले दस्तावेज आगे की कानूनी कार्रवाई का आधार बन सकते हैं।
फिलहाल इतना स्पष्ट है कि शत्रु संपत्ति का मामला जौहर यूनिवर्सिटी से जुड़े बड़े जांच प्रकरण का हिस्सा बना हुआ है। आजम खान और ट्रस्ट पर लगे आरोपों की अंतिम सच्चाई अदालत में पेश होने वाले सबूतों और फैसले से ही तय होगी।











