एशियन पैरा गेम्स में भारत की पदक दौड़ तेज, एथलेटिक्स और तीरंदाजी में भी शानदार प्रदर्शन
एशियन पैरा गेम्स 2026 में भारतीय खिलाड़ियों ने विभिन्न स्पर्धाओं में प्रभावशाली प्रदर्शन करते हुए देश की पदक उम्मीदों को मजबूत किया है। पुरुषों की F46 शॉट पुट स्पर्धा में तीनों पदक जीतने के अलावा भारतीय खिलाड़ियों ने ऊँची कूद, अन्य शॉट पुट वर्गों, तीरंदाजी और दौड़ की स्पर्धाओं में भी पदक हासिल किए। इन परिणामों ने प्रतियोगिता में भारत की व्यापक भागीदारी और प्रतिस्पर्धात्मक क्षमता को सामने रखा है।
ऊँची कूद में भी भारत को सफलता
पुरुषों की ऊँची कूद की T44/64 स्पर्धा में प्रवीण कुमार ने स्वर्ण पदक जीता। उन्होंने 2.05 मीटर की छलांग लगाकर खेलों का नया रिकॉर्ड बनाया। इसी स्पर्धा में बंटी ने 1.92 मीटर की छलांग के साथ रजत पदक हासिल किया।
ऊँची कूद में खिलाड़ी को निर्धारित बार को बिना गिराए पार करना होता है। इसमें गति, तकनीक, संतुलन और शरीर पर नियंत्रण की अहम भूमिका होती है। पैरा एथलेटिक्स में वर्गीकरण के अनुसार प्रतियोगिता आयोजित की जाती है, ताकि खिलाड़ियों को उनकी शारीरिक स्थिति के अनुरूप प्रतिस्पर्धा का अवसर मिले।
शॉट पुट की दूसरी स्पर्धाओं में भी पदक
पुरुषों की F53 शॉट पुट स्पर्धा में आयुष वर्मा ने 8.16 मीटर के थ्रो के साथ स्वर्ण पदक जीता। यह प्रदर्शन भारत के लिए एक और महत्वपूर्ण उपलब्धि रहा। अलग-अलग वर्गों में भारतीय खिलाड़ियों की सफलता बताती है कि पैरा एथलेटिक्स में देश का प्रदर्शन केवल एक स्पर्धा तक सीमित नहीं है।
तीरंदाजी में भारतीय जोड़ी ने जीता रजत
महिला कंपाउंड डबल्स तीरंदाजी में शीतल देवी और पायल नाग की जोड़ी ने रजत पदक हासिल किया। फाइनल मुकाबले में भारतीय जोड़ी को चीन की टीम के खिलाफ हार का सामना करना पड़ा। इसके बावजूद फाइनल तक पहुँचना और रजत पदक जीतना एक महत्वपूर्ण उपलब्धि है।
तीरंदाजी में निशाने की सटीकता, एकाग्रता और दबाव में स्थिर प्रदर्शन निर्णायक होते हैं। पैरा तीरंदाजी में खिलाड़ियों की विशिष्ट जरूरतों के अनुसार उपकरणों और तकनीक का उपयोग भी महत्वपूर्ण होता है।
दौड़ में भी भारतीय खिलाड़ियों का प्रदर्शन
पुरुषों की 100 मीटर T35 स्पर्धा में अनुभव चौधरी ने कांस्य पदक जीता। उन्होंने 12.72 सेकंड का समय दर्ज किया। पुरुषों की 100 मीटर T37 स्पर्धा में राकेशभाई भट्ट ने भी कांस्य पदक हासिल किया।
इन नतीजों से पता चलता है कि भारतीय दल ने मैदान की स्पर्धाओं के साथ ट्रैक इवेंट्स में भी पदक जीते। अलग-अलग खेलों में खिलाड़ियों की सफलता के पीछे प्रशिक्षण, तकनीकी तैयारी और प्रतियोगिता का अनुभव महत्वपूर्ण होता है।
पैरा खेलों को बढ़ावा देने की जरूरत
अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पदक जीतने से खिलाड़ियों को पहचान मिलती है और भविष्य के खिलाड़ियों के लिए प्रेरणा पैदा होती है। लेकिन दीर्घकालिक सफलता के लिए प्रशिक्षण केंद्र, योग्य प्रशिक्षक, सुलभ खेल सुविधाएँ और नियमित प्रतियोगिताएँ भी जरूरी हैं।
एशियन पैरा गेम्स में भारतीय खिलाड़ियों का यह प्रदर्शन देश के पैरा खेल कार्यक्रमों के लिए सकारात्मक संकेत है। आगे की प्रतियोगिताओं में खिलाड़ियों के प्रदर्शन और भारत की कुल पदक तालिका पर नजर रहेगी।











