NDRF Rescue at Mountain Helicopter Crash

चमोली हादसे में खत्म हुआ 38 घंटे का रेस्क्यू अभियान, हेलीकॉप्टर में सवार सभी 6 लोगों की मौत

चमोली: उत्तराखंड के चमोली जिले में हुए दर्दनाक हेलीकॉप्टर हादसे के बाद चलाया जा रहा रेस्क्यू अभियान पूरा हो गया है। करीब 38 घंटे तक चले अभियान के बाद रविवार सुबह हेलीकॉप्टर में सवार सभी छह लोगों के शव दुर्गम पहाड़ी इलाके से बाहर निकाल लिए गए। इसके बाद शवों को जोशीमठ पहुंचाया गया और वहां से एम्स ऋषिकेश भेज दिया गया।

इस हादसे में हेलीकॉप्टर के पायलट समेत पांच यात्रियों की मौत हुई थी। शुक्रवार 30 अक्टूबर को बदरीनाथ धाम से देहरादून लौटते समय हेलीकॉप्टर दुर्घटनाग्रस्त हो गया था। खराब मौसम और पहाड़ी रास्तों की वजह से बचाव दल को शवों को निकालने में काफी मुश्किलों का सामना करना पड़ा।

रविवार सुबह पूरा हुआ रेस्क्यू अभियान

हादसे की जानकारी मिलते ही सेना, आईटीबीपी, एनडीआरएफ, एसडीआरएफ, पुलिस और जिला प्रशासन की टीमें मौके पर पहुंच गई थीं। दुर्घटनास्थल पहाड़ी के दुर्गम इलाके में था, जहां सड़क से सीधे पहुंचना संभव नहीं था।

रेस्क्यू टीमों को पैदल रास्तों से घटनास्थल तक पहुंचना पड़ा। कई जगह रास्ते बेहद कठिन थे। खराब मौसम और अंधेरे ने भी अभियान को मुश्किल बना दिया।

लगातार प्रयास के बाद रविवार सुबह सभी छह शवों को पहाड़ी से नीचे लाया गया। इसके बाद शवों को सड़क मार्ग तक पहुंचाकर जोशीमठ के सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र ले जाया गया। जिला प्रशासन ने सभी शव बरामद होने के बाद रेस्क्यू अभियान पूरा होने की जानकारी दी।

पोस्टमॉर्टम और पहचान के लिए एम्स ऋषिकेश भेजे गए शव

जोशीमठ में जरूरी कानूनी प्रक्रिया पूरी करने के बाद सभी छह शवों को हेलीकॉप्टर के जरिए एम्स ऋषिकेश भेजा गया है। वहां पोस्टमॉर्टम और पहचान से जुड़ी जरूरी प्रक्रियाएं पूरी की जाएंगी।

अधिकारियों के अनुसार, हादसे में शवों की स्थिति खराब होने के कारण पहचान सुनिश्चित करने के लिए डीएनए जांच भी कराई जा सकती है। सभी जरूरी औपचारिकताएं पूरी होने के बाद शव परिजनों को सौंपे जाएंगे।

बदरीनाथ से देहरादून लौटते समय हुआ था हादसा

जानकारी के मुताबिक, ट्रांस भारत एविएशन का निजी हेलीकॉप्टर शुक्रवार 30 अक्टूबर को बदरीनाथ धाम से देहरादून के सहस्त्रधारा हेलीपोर्ट के लिए रवाना हुआ था।

इसी दौरान चमोली जिले के ज्योतिर्मठ क्षेत्र में चांई गांव के पास हेलीकॉप्टर दुर्घटनाग्रस्त हो गया। हादसे के समय इलाके में मौसम खराब था और बारिश के साथ कम दृश्यता की समस्या भी थी।

हेलीकॉप्टर का मलबा पहाड़ी पर मिलने के बाद बचाव अभियान शुरू किया गया था।

हादसे की जांच में जुटी डीजीसीए की टीम

हेलीकॉप्टर दुर्घटना के कारणों का पता लगाने के लिए नागरिक उड्डयन महानिदेशालय यानी डीजीसीए की टीम भी जांच में जुटी है।

जांच में यह पता लगाने की कोशिश की जाएगी कि हादसा खराब मौसम की वजह से हुआ या इसके पीछे कोई तकनीकी खराबी अथवा दूसरा कारण था।

फिलहाल सभी छह मृतकों के शव बरामद कर लिए गए हैं और रेस्क्यू अभियान समाप्त हो चुका है। इस हादसे ने एक बार फिर उत्तराखंड के पहाड़ी क्षेत्रों में हेलीकॉप्टर सेवाओं की सुरक्षा को लेकर सवाल खड़े कर दिए हैं।