रूस-यूक्रेन युद्ध पर भारत की तीन बड़ी मांगें, जयशंकर ने बताया किन मुद्दों पर चल रही है बातचीत
रूस और यूक्रेन के बीच जारी युद्ध को लेकर भारत लगातार कूटनीतिक स्तर पर प्रयास कर रहा है। विदेश मंत्री एस जयशंकर ने बताया है कि भारत ने रूस, यूक्रेन और यूरोपीय देशों के साथ बातचीत में तीन अहम मुद्दे उठाए हैं। इनमें समुद्र में चलने वाले आम जहाजों और उनके कर्मचारियों की सुरक्षा, रूस और यूक्रेन से अनाज का निर्यात फिर शुरू करना और ऊर्जा से जुड़े ठिकानों पर हमले रोकना शामिल है।
जयशंकर ने यह जानकारी अमेरिका के अटलांटा में आयोजित G20 देशों के विदेश मंत्रियों की बैठक के दौरान दी। उन्होंने कहा कि भारत इस युद्ध का समाधान बातचीत और कूटनीति के जरिए निकालने के पक्ष में है। भारत इस मामले में रूस, यूक्रेन और अमेरिका के संपर्क में भी है।
भारत ने बातचीत में उठाए तीन बड़े मुद्दे
विदेश मंत्री जयशंकर के मुताबिक, रूस-यूक्रेन युद्ध का असर केवल इन दोनों देशों तक सीमित नहीं है। इसका प्रभाव दुनिया के कई देशों की अर्थव्यवस्था, खाद्य आपूर्ति और ऊर्जा व्यवस्था पर भी पड़ रहा है।
भारत ने बातचीत के दौरान तीन प्रमुख विषयों पर ध्यान देने की जरूरत बताई है।
1. समुद्री जहाजों और कर्मचारियों की सुरक्षा
भारत की पहली मांग है कि युद्ध के दौरान आम नागरिकों के इस्तेमाल वाले समुद्री जहाजों और उन पर काम करने वाले कर्मचारियों को निशाना नहीं बनाया जाना चाहिए।
समुद्र के रास्ते दुनिया के कई देशों में जरूरी सामान, ईंधन और खाद्य सामग्री पहुंचाई जाती है। ऐसे में जहाजों पर हमले होने से अंतरराष्ट्रीय व्यापार और आम लोगों की सुरक्षा प्रभावित होती है।
भारत चाहता है कि समुद्री रास्तों पर सामान ले जाने वाले जहाजों की आवाजाही सुरक्षित बनी रहे।
2. रूस और यूक्रेन से अनाज का निर्यात फिर शुरू हो
भारत की दूसरी बड़ी चिंता अनाज की आपूर्ति को लेकर है। रूस और यूक्रेन दुनिया के प्रमुख अनाज निर्यातक देशों में शामिल हैं।
युद्ध के कारण काला सागर के रास्ते होने वाला अनाज का व्यापार प्रभावित हुआ है। इससे कई देशों में खाद्य सामग्री की आपूर्ति पर असर पड़ा है।
जयशंकर ने कहा कि दोनों देशों से अनाज का निर्यात फिर से शुरू करने का रास्ता निकालना जरूरी है। इसका फायदा खासकर उन विकासशील देशों को मिलेगा, जो दूसरे देशों से आने वाले अनाज पर निर्भर हैं।
3. ऊर्जा ठिकानों और ईंधन की आपूर्ति पर हमले रोकना
जयशंकर ने तीसरे मुद्दे को सबसे जटिल बताया। उन्होंने कहा कि ऊर्जा से जुड़े ठिकानों पर हमले रोकने का मतलब अलग-अलग देशों के लिए अलग हो सकता है।
इसमें तेल रिफाइनरी, बिजली के ग्रिड और ईंधन लेकर जाने वाले जहाज शामिल हैं। युद्ध के दौरान इन पर हमले होने से दुनिया के कई देशों में पेट्रोलियम उत्पादों और बिजली की आपूर्ति प्रभावित हो सकती है।
भारत चाहता है कि ऊर्जा से जुड़े ठिकानों और ईंधन की आपूर्ति करने वाले जहाजों को सुरक्षित रखने के लिए सभी पक्षों के बीच सहमति बने।
मोदी और पुतिन के बीच भी हुई है चर्चा
जयशंकर ने बताया कि रूस-यूक्रेन युद्ध को लेकर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन के बीच भी बातचीत हुई है।
उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री मोदी ने दिल्ली में पुतिन से इस मुद्दे पर चर्चा की थी। इससे पहले बिश्केक में भी दोनों नेताओं के बीच बातचीत हुई थी।
इसके अलावा जयशंकर खुद मॉस्को और कीव का दौरा कर चुके हैं। उन्होंने रूस के विदेश मंत्री सर्गेई लावरोव से भी इस विषय पर बातचीत की है।
भारत यूक्रेन के नेताओं के संपर्क में भी है। इसके साथ ही अमेरिका के विदेश मंत्री मार्को रुबियो के साथ भी बातचीत और तालमेल बनाए रखा जा रहा है।
जयशंकर बोले- युद्ध का समाधान बातचीत से ही निकलेगा
G20 बैठक में जयशंकर ने कहा कि दुनिया में चल रहे बड़े संघर्षों का असर पूरी दुनिया पर पड़ रहा है। ऐसे मामलों में केवल सैन्य कार्रवाई से समाधान नहीं निकाला जा सकता। इसके लिए बातचीत और कूटनीति को मौका देना जरूरी है।
उन्होंने यह भी कहा कि ऊर्जा बाजार में गड़बड़ी और ईंधन की आपूर्ति को राजनीति से जोड़ना नुकसानदायक है। इसका सबसे ज्यादा असर विकासशील देशों पर पड़ता है।
भारत का मानना है कि युद्ध के कारण खाद्य सामग्री, ईंधन और खाद की आपूर्ति प्रभावित नहीं होनी चाहिए। इन चीजों की कमी का सीधा असर आम लोगों और किसानों पर पड़ता है।
विकासशील देशों पर पड़ रहा युद्ध का असर
रूस और यूक्रेन के बीच लंबे समय से जारी संघर्ष ने अंतरराष्ट्रीय व्यापार को प्रभावित किया है। खासकर काला सागर के रास्ते होने वाले अनाज के कारोबार में बाधाएं आई हैं।
इसके अलावा ऊर्जा आपूर्ति और खाद की उपलब्धता को लेकर भी कई देशों को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।
भारत ने G20 बैठक में इन समस्याओं को उठाते हुए कहा कि दुनिया के देशों को मिलकर ऐसी व्यवस्था बनानी चाहिए, जिससे किसी एक क्षेत्र में युद्ध होने पर पूरी दुनिया की आपूर्ति व्यवस्था प्रभावित न हो।
फिलहाल भारत रूस, यूक्रेन, यूरोपीय देशों और अमेरिका के साथ बातचीत जारी रखे हुए है। जयशंकर ने बातचीत के मौजूदा हालात का पूरा विवरण सार्वजनिक नहीं किया है, लेकिन उन्होंने साफ किया कि भारत युद्ध के समाधान के लिए कूटनीतिक प्रयासों को आगे बढ़ाना चाहता है।











