जमीन पर अवैध कब्जे की शिकायतों पर योगी सख्त, पीड़ितों को न्याय दिलाने के लिए अधिकारियों को दिए निर्देश
गोरखपुर में जनता दर्शन के दौरान मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने करीब 200 लोगों की शिकायतें सुनीं। जमीन पर अवैध कब्जे के मामलों में कार्रवाई और भूमाफिया को जेल भेजने के निर्देश दिए।
गोरखनाथ मंदिर में लगा जनता दर्शन, मुख्यमंत्री ने सुनीं फरियाद
उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने सोमवार, 2 नवंबर को गोरखपुर स्थित गोरखनाथ मंदिर में जनता दर्शन के दौरान लोगों की समस्याएं सुनीं। इस दौरान करीब 200 लोग अपनी शिकायतें और परेशानियां लेकर पहुंचे। मुख्यमंत्री ने एक-एक कर लोगों की बात सुनी और संबंधित अधिकारियों को समस्याओं का समय पर समाधान करने के निर्देश दिए।
जनता दर्शन में जमीन पर जबरन कब्जा किए जाने की शिकायतें भी सामने आईं। इस पर मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को साफ निर्देश दिया कि किसी की जमीन पर अवैध रूप से कब्जा करने वालों के खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई की जाए। उन्होंने कहा कि पीड़ितों को उनकी जमीन वापस दिलाई जाए और जबरन कब्जा करने वालों को कानून के अनुसार सजा दिलाने की कार्रवाई हो।
करीब 200 लोगों की समस्याएं सुनीं
गोरखनाथ मंदिर परिसर में आयोजित इस कार्यक्रम में फरियादियों के बैठने की व्यवस्था की गई थी। मुख्यमंत्री खुद लोगों के पास पहुंचे और उनकी समस्याएं जानीं। लोगों ने जमीन विवाद, कब्जे और दूसरी प्रशासनिक परेशानियों से जुड़ी शिकायतें रखीं।
मुख्यमंत्री ने संबंधित अधिकारियों को शिकायतों के आधार पर कार्रवाई करने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि हर पीड़ित व्यक्ति की बात को संवेदनशीलता के साथ सुना जाए और उसकी समस्या का समाधान तय समय के भीतर किया जाए।
जनता दर्शन का उद्देश्य लोगों को अपनी समस्याएं सीधे मुख्यमंत्री तक पहुंचाने का अवसर देना है। इस दौरान मिले प्रार्थना पत्रों को संबंधित विभागों और अधिकारियों के पास भेजा जाता है, ताकि उन पर आगे कार्रवाई की जा सके।
पारिवारिक विवाद और अवैध कब्जे के मामलों में अलग-अलग कार्रवाई
जमीन से जुड़े सभी विवाद एक जैसे नहीं होते। कुछ मामले परिवार के सदस्यों के बीच बंटवारे या संपत्ति के अधिकार को लेकर होते हैं, जबकि कुछ मामलों में जबरन कब्जे की शिकायत होती है।
मुख्यमंत्री ने पहले भी अधिकारियों को निर्देश दिए हैं कि पारिवारिक जमीन विवादों में संबंधित पक्षों के बीच बातचीत से समाधान निकालने का प्रयास किया जाए। वहीं, अवैध कब्जे और कमजोर लोगों को उनकी जमीन से हटाने के मामलों में कठोर कानूनी कार्रवाई की जाए।
ऐसे मामलों में पुलिस और राजस्व विभाग की भूमिका महत्वपूर्ण होती है। जमीन के दस्तावेजों की जांच, मौके की स्थिति और शिकायत से जुड़े तथ्यों के आधार पर कार्रवाई की जानी चाहिए।
अधिकारियों की जवाबदेही भी होगी तय
मुख्यमंत्री ने जनता दर्शन में मौजूद अधिकारियों को निर्देश दिया कि शिकायतों का निस्तारण समयबद्ध और पारदर्शी तरीके से किया जाए। किसी पीड़ित को अपनी समस्या के समाधान के लिए बार-बार सरकारी दफ्तरों के चक्कर न लगाने पड़ें।
जमीन पर कब्जे की शिकायतों में प्रशासन की जिम्मेदारी केवल आवेदन प्राप्त करने तक सीमित नहीं है। शिकायत की जांच, उचित कार्रवाई और पीड़ित को राहत दिलाना भी जरूरी है।
अब इन निर्देशों के बाद संबंधित अधिकारियों के सामने शिकायतों की जांच कर उचित कार्रवाई करने की जिम्मेदारी है। हालांकि, किसी व्यक्ति को भूमाफिया या दोषी मानने से पहले मामले की जांच और कानूनी प्रक्रिया पूरी करना जरूरी होगा।
मुख्य बात यह है कि मुख्यमंत्री ने जमीन पर जबरन कब्जे के मामलों में सख्त रुख अपनाते हुए अवैध कब्जा हटाने और दोषियों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई करने के निर्देश दिए हैं।











