High-Court-with-Suryaa-Poster

डॉक्टरों की शिकायत पर कोर्ट पहुंची सनी देओल की फिल्म, ‘सूर्या’ के निर्माताओं को देना होगा जवाब

बॉलीवुड अभिनेता सनी देओल की आने वाली फिल्म ‘सूर्या: अंत से आरंभ तक’ रिलीज से पहले विवादों में घिर गई है। फिल्म के टीजर में डॉक्टरों और निजी अस्पतालों को जिस तरह दिखाया गया है, उसे लेकर कुछ डॉक्टरों ने आपत्ति जताई है। मामला दिल्ली हाईकोर्ट पहुंचने के बाद अब फिल्म के निर्माताओं और संबंधित सरकारी विभागों को जवाब देना होगा।

दिल्ली हाईकोर्ट ने सोमवार, 2 नवंबर को इस मामले में केंद्र सरकार, केंद्रीय फिल्म प्रमाणन बोर्ड (CBFC) और फिल्म के निर्माताओं सहित संबंधित पक्षों को नोटिस जारी किया। अदालत ने सभी से अपना पक्ष रखने को कहा है। मामले की अगली सुनवाई 16 नवंबर को होगी।

चार डॉक्टरों ने दाखिल की याचिका

यह याचिका दिल्ली के चार डॉक्टरों ने दाखिल की है। इनमें डॉ. निशांत सोनी, डॉ. आशीष तोमर, डॉ. रवि भाटिया और डॉ. शिवम वत्सल शामिल हैं। ये डॉक्टर अलग-अलग कॉर्पोरेट अस्पतालों में काम करते हैं और इनमें से कुछ डॉक्टर्स ऑफ कॉर्पोरेट सोसाइटी (DOCS) से भी जुड़े हैं।

याचिकाकर्ताओं का आरोप है कि फिल्म के टीजर में निजी अस्पतालों और वहां काम करने वाले डॉक्टरों को गलत तरीके से पेश किया गया है। उनका कहना है कि टीजर देखने वाले लोगों के मन में यह धारणा बन सकती है कि निजी अस्पतालों में डॉक्टर मरीजों से अधिक पैसे वसूलते हैं, गैरजरूरी जांच करवाते हैं और कमीशन के लिए काम करते हैं।

डॉक्टरों ने आशंका जताई है कि इस तरह की प्रचार सामग्री से स्वास्थ्यकर्मियों के प्रति लोगों में गुस्सा बढ़ सकता है और उनके खिलाफ हिंसा की घटनाओं को बढ़ावा मिल सकता है।

अंगों की खरीद-फरोख्त से जुड़ी कहानी पर भी सवाल

याचिका में फिल्म की कहानी और उसके प्रचार के तरीके पर भी सवाल उठाए गए हैं। डॉक्टरों के मुताबिक, टीजर में एक निजी अस्पताल में ब्रेन-स्टेम डेथ घोषित किए जाने के बाद मरीज के अंगदान की सहमति लेने का दृश्य दिखाया गया है।

टीजर में मेडिकल व्यवस्था की कथित सच्चाई सामने लाने का दावा किया गया है। इसमें कहानी को अविश्वसनीय सच्ची घटनाओं से प्रेरित बताया गया है। डॉक्टरों का कहना है कि इससे दर्शकों को फिल्म की काल्पनिक घटनाएं वास्तविक लग सकती हैं।

याचिकाकर्ताओं ने यह भी कहा है कि फिल्म के कुछ दृश्यों में अस्पताल के कर्मचारियों के साथ मारपीट दिखाई गई है। उन्हें आशंका है कि ऐसे दृश्य स्वास्थ्यकर्मियों के खिलाफ नकारात्मक माहौल बना सकते हैं। हालांकि, ये सभी याचिकाकर्ताओं की ओर से लगाए गए आरोप हैं, जिन पर अदालत ने अभी कोई अंतिम फैसला नहीं दिया है।

डॉक्टरों ने टीजर हटाने और डिस्क्लेमर लगाने की मांग की

याचिका में अदालत से मांग की गई है कि फिल्म के टीजर और प्रचार सामग्री की जांच कराई जाए। डॉक्टर चाहते हैं कि जांच पूरी होने तक टीजर को ऑनलाइन प्लेटफॉर्म से हटाया जाए या उसकी उपलब्धता पर रोक लगाई जाए।

इसके अलावा फिल्म में स्पष्ट डिस्क्लेमर लगाने की मांग भी की गई है, जिसमें बताया जाए कि इसकी कहानी काल्पनिक है। डॉक्टरों ने यह भी कहा है कि ऑनलाइन जारी होने वाले फिल्मी टीजर और ट्रेलर की जांच के लिए उचित दिशा-निर्देश बनाए जाने चाहिए।

हालांकि, दिल्ली हाईकोर्ट ने फिलहाल टीजर हटाने या उसकी स्क्रीनिंग रोकने का आदेश नहीं दिया है। अदालत ने संबंधित पक्षों से जवाब मांगा है।

20 नवंबर को सिनेमाघरों में रिलीज होनी है फिल्म

‘सूर्या: अंत से आरंभ तक’ की रिलीज तारीख 20 नवंबर 2026 तय बताई गई है। ऐसे में 16 नवंबर को होने वाली अगली सुनवाई फिल्म के निर्माताओं के लिए महत्वपूर्ण होगी। अदालत में केंद्र सरकार, CBFC और निर्माता अपना जवाब दाखिल करेंगे।

फिलहाल फिल्म की रिलीज पर रोक लगाने का कोई आदेश सामने नहीं आया है। यह भी स्पष्ट है कि नोटिस जारी होना फिल्म के खिलाफ अंतिम फैसला नहीं है। अब आगे की कानूनी प्रक्रिया और अदालत की सुनवाई से तय होगा कि फिल्म के टीजर या प्रचार सामग्री में किसी बदलाव की जरूरत पड़ती है या नहीं।