दिल्ली की हवा हुई जहरीली, बढ़ते प्रदूषण के बीच GRAP-2 लागू करने की तैयारी
दिल्ली में वायु प्रदूषण ने एक बार फिर लोगों की परेशानी बढ़ा दी है। सोमवार, 2 नवंबर को राजधानी का वायु गुणवत्ता सूचकांक (AQI) 324 दर्ज किया गया। इसके साथ ही दिल्ली की हवा इस मौसम में पहली बार बेहद खराब श्रेणी में पहुंच गई।
प्रदूषण की स्थिति को देखते हुए वायु गुणवत्ता प्रबंधन आयोग (CAQM) ने दिल्ली-NCR में ग्रेडेड रिस्पॉन्स एक्शन प्लान (GRAP) के दूसरे चरण को तत्काल प्रभाव से लागू कर दिया। इससे पहले 21 अक्टूबर को प्रदूषण बढ़ने पर GRAP-1 लागू किया गया था।
आयोग के अनुसार, मौसम की प्रतिकूल परिस्थितियों के कारण प्रदूषण बढ़ रहा है। मौसम विभाग और भारतीय उष्णकटिबंधीय मौसम विज्ञान संस्थान के पूर्वानुमान में आने वाले दिनों में भी हवा की गुणवत्ता बेहद खराब बने रहने की आशंका जताई गई है।
कई इलाकों में प्रदूषण का स्तर गंभीर
राजधानी के अलग-अलग इलाकों में प्रदूषण की स्थिति और भी चिंताजनक रही। सोमवार शाम को जहांगीरपुरी में AQI 442 तक पहुंच गया। रोहिणी में 415 और पंजाबी बाग में 413 दर्ज किया गया। ये इलाके गंभीर श्रेणी में पहुंच गए थे।
दिल्ली के 58 निगरानी केंद्रों में से 39 पर हवा की गुणवत्ता बेहद खराब दर्ज की गई, जबकि तीन केंद्रों पर प्रदूषण गंभीर श्रेणी में रहा।
हवा में मौजूद PM2.5 कण भी चिंता का विषय बने हुए हैं। ये बेहद छोटे कण सांस के जरिए फेफड़ों में गहराई तक पहुंच सकते हैं और स्वास्थ्य को नुकसान पहुंचा सकते हैं। बच्चों, बुजुर्गों और सांस से जुड़ी परेशानी वाले लोगों के लिए ऐसी हवा अधिक जोखिम पैदा कर सकती है।
GRAP-2 में क्या-क्या पाबंदियां लागू होंगी?
GRAP-2 लागू होने के बाद प्रशासन को प्रदूषण कम करने के लिए अतिरिक्त कदम उठाने होंगे। इनमें प्रमुख रूप से ये उपाय शामिल हैं:
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सड़कों की मशीनों से नियमित सफाई कराई जाएगी।
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धूल कम करने के लिए सड़कों पर पानी का छिड़काव होगा।
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अधिक प्रदूषण वाले इलाकों में एंटी स्मॉग गन का इस्तेमाल किया जाएगा।
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व्यस्त सड़कों और चौराहों पर ट्रैफिक व्यवस्था बेहतर की जाएगी।
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वाहनों के प्रदूषण प्रमाणपत्र यानी PUC की जांच तेज होगी।
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प्रदूषण फैलाने वाले वाहनों पर कार्रवाई की जाएगी।
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सार्वजनिक परिवहन सेवाओं को बढ़ावा दिया जाएगा।
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मेट्रो और बस सेवाओं की संख्या बढ़ाने जैसे कदम उठाए जाएंगे।
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निर्माण स्थलों और औद्योगिक इकाइयों की निगरानी सख्त होगी।
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डीजल जनरेटर के इस्तेमाल पर निर्धारित नियमों के अनुसार नियंत्रण रखा जाएगा।
इसके अलावा निजी वाहनों का इस्तेमाल कम करने के लिए पार्किंग शुल्क बढ़ाने जैसे उपाय भी लागू किए जा रहे हैं।
दिल्ली मेट्रो की बढ़ेंगी अतिरिक्त यात्राएं
सड़कों पर वाहनों की संख्या कम करने और लोगों को सार्वजनिक परिवहन की ओर प्रोत्साहित करने के लिए दिल्ली मेट्रो ने भी कदम उठाया है। मंगलवार से मेट्रो की अतिरिक्त यात्राएं शुरू की गई हैं। इससे यात्रियों को आवागमन में सुविधा मिलने और निजी वाहनों पर निर्भरता घटाने में मदद मिलने की उम्मीद है।
दिल्ली सरकार और संबंधित एजेंसियों को प्रदूषण नियंत्रण के उपायों पर लगातार निगरानी रखने के निर्देश दिए गए हैं। साथ ही लोगों से भी सार्वजनिक परिवहन का इस्तेमाल करने, वाहन बंद करके सिग्नल पर इंतजार करने और कूड़ा नहीं जलाने की अपील की गई है।
पराली का धुआं और मौसम भी बढ़ा रहे परेशानी
दिल्ली में प्रदूषण बढ़ने के पीछे कई कारण हैं। इनमें वाहनों से निकलने वाला धुआं, निर्माण कार्यों से उड़ने वाली धूल, औद्योगिक प्रदूषण और आसपास के राज्यों में पराली जलाना शामिल है।
पंजाब और हरियाणा में पराली जलाने की घटनाओं के कारण उठने वाला धुआं हवा के साथ दिल्ली-NCR तक पहुंच सकता है। इसके अलावा हवा की रफ्तार कम होने और मौसम में बदलाव के कारण प्रदूषक तत्व वातावरण में लंबे समय तक बने रहते हैं।
पूर्वानुमान के मुताबिक, 3 से 5 नवंबर तक दिल्ली की हवा बेहद खराब श्रेणी में रह सकती है। ऐसे में आने वाले दिनों में प्रदूषण से राहत मिलना मौसम की स्थिति पर भी निर्भर करेगा।
लोगों को बरतनी होगी सावधानी
डॉक्टरों और स्वास्थ्य विशेषज्ञों की सलाह है कि प्रदूषण बढ़ने पर अनावश्यक रूप से लंबे समय तक खुले में रहने से बचना चाहिए। सुबह और शाम के समय बाहर व्यायाम करने से पहले हवा की गुणवत्ता की जानकारी लेना उपयोगी है।
बच्चों और बुजुर्गों को विशेष सावधानी बरतनी चाहिए। सांस लेने में परेशानी, लगातार खांसी या आंखों में जलन होने पर चिकित्सकीय सलाह लेनी चाहिए।
दिल्ली-NCR में GRAP-2 लागू होने के बाद अब प्रशासन के सामने सबसे बड़ी चुनौती प्रदूषण को और बढ़ने से रोकना है। आने वाले कुछ दिन राजधानी की हवा के लिहाज से महत्वपूर्ण रहने वाले हैं।











